आपने कभी न कभी बालों में नारियल तेल जरूर लगाया होगा। लेकिन जब इसे खरीदने की बारी आती है, तो कन्फ्यूजन शुरू हो जाता है। बाजार में तीन तरह के नारियल तेल मिलते हैं—
- 100% प्योर कोकोनट ऑयल
- कोल्ड प्रेस (वुड प्रेस) कोकोनट ऑयल
- वर्जिन या एक्स्ट्रा वर्जिन कोकोनट ऑयल
कीमत में भी बड़ा अंतर होता है। जहां 100% प्योर तेल 400 रुपये के आसपास मिल जाता है, वहीं वर्जिन कोकोनट ऑयल 700 से 1000 रुपये तक बिकता है। सवाल उठता है—जब 100% प्योर ही मिल रहा है, तो उससे ज्यादा “प्योर” क्या हो सकता है? क्या महंगा वाला सच में बेहतर है या सिर्फ मार्केटिंग का खेल है?
आइए पूरी बात समझते हैं।
100% प्योर कोकोनट ऑयल: असल में होता क्या है?
इस तरह का तेल सूखे नारियल (Copra) से बनाया जाता है। कच्चा नारियल बिल्कुल सफेद होता है, लेकिन सूखने के बाद उसमें हल्का पीलापन आ जाता है। ऐसा क्यों?
कच्चे नारियल में लगभग आधा हिस्सा पानी होता है। जब नारियल सूखता है तो पानी खत्म हो जाता है और उसका वजन 100 ग्राम से घटकर लगभग 50–55 ग्राम रह जाता है। प्रोटीन, फैट और कार्बोहाइड्रेट लगभग समान रहते हैं, लेकिन:
- एंजाइम्स खत्म हो जाते हैं
- विटामिन C काफी हद तक नष्ट हो जाता है
- विटामिन E और एंटीऑक्सीडेंट में थोड़ी कमी आती है
रंग बदलने के तीन कारण होते हैं:
- फैट का ऑक्सीडेशन – धूप या गर्मी के संपर्क में आने से हल्का पीला रंग।
- पॉलीफेनोल का ऑक्सीडेशन – हवा लगने पर क्रीम या हल्का ब्राउन रंग (जैसे कटा हुआ सेब)।
- प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट पर हीट का असर – हल्का पीला या भूरा शेड (जैसे ब्रेड टोस्ट करने पर)।
अगर सूखा नारियल ज्यादा समय तक पड़ा रहे तो ऑक्सीडेशन बढ़ता है और पोषक तत्व कम होते जाते हैं। लेकिन ताजा सूखे नारियल में अधिकतर गुण बरकरार रहते हैं।
तेल निकालने का तरीका क्यों बदल देता है क्वालिटी?
सूखे नारियल से तेल निकालने के दो मुख्य तरीके होते हैं:
1. हाई स्पीड मशीन (साधारण प्योर ऑयल)
इसमें मशीन तेज़ी से घूमती है और बहुत ज्यादा दबाव डालती है। फायदा यह कि:
- ज्यादा तेल निकलता है
- कम समय में उत्पादन होता है
- वेस्टेज कम होता है
लेकिन हाई स्पीड और प्रेशर के कारण हीट पैदा होती है, जिससे कई पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं। यही कारण है कि यह तेल हल्का पीला दिखता है।
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2. वुड प्रेस या कोल्ड प्रेस ऑयल
इसमें लकड़ी का रोलर धीरे-धीरे घूमता है। प्रक्रिया धीमी होती है, लेकिन:
- हीट लगभग नहीं बनती
- रिफाइनिंग नहीं होती
- ज्यादा पोषक तत्व सुरक्षित रहते हैं
इसका रंग हल्का क्रीम जैसा होता है। इसे वुड प्रेस या कोल्ड प्रेस कहा जाता है।
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वर्जिन या एक्स्ट्रा वर्जिन कोकोनट ऑयल क्या है?
इसमें सूखे नारियल की जगह कच्चे नारियल का उपयोग होता है। प्रक्रिया लंबी होती है:
- पहले नारियल का दूध निकाला जाता है
- फिर सेंट्रीफ्यूगल मशीन से तेल और पानी अलग किया जाता है
- कम से कम या बिना हीट के तेल निकाला जाता है
क्योंकि इसमें कच्चा नारियल इस्तेमाल होता है और गर्मी का प्रयोग बहुत कम होता है, इसलिए:
- ज्यादा विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट सुरक्षित रहते हैं
- रंग बिल्कुल साफ या हल्का क्लाउडी होता है
- पीलापन नहीं होता
पोषक तत्वों के हिसाब से यह तीनों में सबसे ऊपर माना जाता है।
किस उपयोग के लिए कौन सा तेल बेहतर?
ऑयल पुलिंग
तीनों में फैट लगभग समान होता है, इसलिए किसी का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
हालांकि वर्जिन ऑयल में हीलिंग प्रॉपर्टीज ज्यादा होने से मसूड़ों के लिए थोड़ा अतिरिक्त लाभ मिल सकता है।
खाना बनाने के लिए
वर्जिन ऑयल में कई हीट-सेंसिटिव माइक्रो न्यूट्रिएंट होते हैं जो कम तापमान पर भी प्रभावित हो सकते हैं।
इसलिए खाना बनाने के लिए वुड प्रेस (कोल्ड प्रेस) ऑयल ज्यादा संतुलित विकल्प है।
बालों के लिए
तीनों फायदेमंद हैं।
लेकिन फायदे की क्रम में देखें तो:
प्योर < वुड प्रेस < वर्जिन
यानी वर्जिन सबसे ज्यादा पोषण देता है। यहां चुनाव आपके बजट पर निर्भर करता है।
चेहरे के लिए
नारियल तेल हाईली कॉमेडोजेनिक होता है। कुछ लोगों में यह पोर्स ब्लॉक कर सकता है और स्किन प्रॉब्लम दे सकता है।
जिसे सूट करता है, उसके लिए वर्जिन ऑयल बेहतर विकल्प हो सकता है।
बॉडी मसाज (बच्चों और बड़ों के लिए)
वर्जिन कोकोनट ऑयल बाकी दोनों से ज्यादा पोषक होने के कारण ज्यादा लाभकारी माना जाता है।
निष्कर्ष
- सबसे ज्यादा पोषक तत्व: वर्जिन कोकोनट ऑयल
- कुकिंग के लिए संतुलित विकल्प: वुड प्रेस ऑयल
- बजट फ्रेंडली विकल्प: 100% प्योर कोकोनट ऑयल
महंगा हमेशा बेकार नहीं होता, लेकिन हर जरूरत के लिए सबसे महंगा जरूरी भी नहीं। सही चुनाव इस बात पर निर्भर करता है कि आप तेल का उपयोग किस काम के लिए कर रहे हैं अब अगली बार जब आप नारियल तेल खरीदने जाएं, तो सिर्फ “प्योर” शब्द देखकर फैसला न करें उसके बनने की प्रक्रिया जरूर समझें।