देश 26 जनवरी के सबसे भव्य पर्व के लिए तैयार है। इस बार गणतंत्र दिवस समारोह कई मायनों में ऐतिहासिक होने वाला है। कर्तव्य पथ पर भारत की सैन्य शक्ति, सांस्कृतिक विविधता और बदलती सोच का ऐसा नजारा दिखेगा, जैसा पहले कभी नहीं देखा गया।
जहां एक ओर वीआईपी कल्चर को खत्म करने की बड़ी पहल की गई है, वहीं दूसरी ओर सेना की नई ताकत और अनोखे प्रतिभागी परेड की शान बढ़ाएंगे। हालांकि, इस भव्य आयोजन के बीच सुरक्षा को लेकर एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं।
इस बार कौन होंगे मुख्य अतिथि?
लंबे समय से चर्चा थी कि इस साल गणतंत्र दिवस पर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन या अमेरिका के डोनाल्ड ट्रंप मुख्य अतिथि हो सकते हैं। लेकिन इस बार भारत ने अलग रास्ता चुना है।
इस वर्ष एक नहीं बल्कि दो मुख्य अतिथि होंगे—
- यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा
- यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयन
यह फैसला भारत और यूरोपीय संघ के मजबूत होते रिश्तों को दर्शाता है और वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका को भी रेखांकित करता है।
परेड में पहली बार दिखेगा कुछ बिल्कुल नया
इस साल गणतंत्र दिवस की थीम “वंदे मातरम्” रखी गई है। परेड में कुल 30 झांकियां शामिल होंगी, जो भारत की संस्कृति, विरासत और सैन्य शक्ति को दर्शाएंगी।
सबसे खास बात यह है कि इस बार परेड में जानवरों की विशेष टुकड़ी भी हिस्सा लेगी। कर्तव्य पथ पर पहली बार:
- बैक्ट्रियन ऊंट
- जांस्कर नस्ल के टट्टू
- भारतीय सेना के विशेष प्रशिक्षित कुत्ते
मार्च करते हुए नजर आएंगे। इसके साथ ही आसमान में निगरानी करने वाले बाज (रैप्टर्स) भी परेड का हिस्सा होंगे। ये जानवर दुर्गम इलाकों में सेना की मदद करते हैं और इस बार पूरा देश इन्हें सम्मान देगा।
सेना की नई ताकत और आसमान में गर्जना
इस बार परेड में भैरव बटालियन अपनी शक्ति का प्रदर्शन करेगी। यह भारतीय सेना की नई और बेहद प्रभावशाली बटालियन मानी जा रही है।
हालांकि वायुसेना का तेजस विमान इस बार परेड में शामिल नहीं होगा, लेकिन आसमान में राफेल और सुखोई जैसे लड़ाकू विमान अपनी गर्जना से माहौल रोमांचक बना देंगे।
वीआईपी कल्चर पर बड़ा फैसला
मोदी सरकार ने इस बार गणतंत्र दिवस समारोह में वीआईपी कल्चर को खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अब वीआईपी या वीवीआईपी सीटों की जगह नहीं होगी।
इसके बजाय दर्शक दीर्घाओं के नाम भारत की पवित्र नदियों पर रखे गए हैं, जैसे—
गंगा, यमुना, नर्मदा और कावेरी
बीटिंग रिट्रीट समारोह में भी स्टैंड्स को भारतीय वाद्य यंत्रों के नाम दिए गए हैं, जैसे—
शंख, नादस्वरम और जलतरंग
यह बदलाव साफ संदेश देता है कि गणतंत्र दिवस किसी खास वर्ग का नहीं, बल्कि पूरे देश का उत्सव है।
खास मेहमान: लखपति दीदियां
इस बार समारोह में कुछ ऐसे अतिथि भी शामिल होंगे, जिन्हें असली नायक कहा जा सकता है। उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों से आई लखपति दीदियों को विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया है।
ये वे महिलाएं हैं जिन्होंने मेहनत और आत्मनिर्भरता से अपनी पहचान बनाई है। इन्हें कर्तव्य पथ पर आगे की कतारों में बैठने का सम्मान मिलेगा, जो नारी शक्ति के सम्मान का प्रतीक है।
सुरक्षा को लेकर हाई अलर्ट
जश्न के बीच सुरक्षा को लेकर एजेंसियां पूरी तरह चौकन्नी हैं। खुफिया सूत्रों के अनुसार, कुछ आतंकी संगठन दिल्ली को निशाना बनाने की कोशिश कर सकते हैं। इसे देखते हुए राजधानी में हाई अलर्ट घोषित किया गया है।
दिल्ली पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने कई इलाकों में एंटी-टेरर मॉक ड्रिल की है। हर वाहन की सख्त जांच हो रही है और शहर को अभेद्य सुरक्षा घेरे में रखा गया है।
निष्कर्ष
इस बार का गणतंत्र दिवस कई मायनों में खास है—यूरोपीय मेहमान, जानवरों की ऐतिहासिक परेड, वीआईपी कल्चर का अंत और नारी शक्ति का सम्मान। यह सब दिखाता है कि भारत परंपरा के साथ-साथ बदलाव की ओर भी तेजी से बढ़ रहा है।