सोना और चांदी लगातार ऊंचाई पर बने हुए थे, लेकिन आज बाजार में अचानक बड़ी गिरावट देखने को मिली। एक ही कारोबारी दिन में चांदी का भाव करीब ₹7,000 टूटकर वापस ₹3,32,000 प्रति किलो के आसपास आ गया। वहीं सोने की कीमत में भी तेज गिरावट दर्ज की गई और दाम करीब ₹15,000 घटकर लगभग ₹1.5 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गए।
इस तेज गिरावट के पीछे मुख्य वजह मुनाफा वसूली मानी जा रही है। जिन निवेशकों ने पहले निचले स्तर पर सोना और चांदी खरीदी थी, उन्होंने ऊंचे दामों पर बिकवाली शुरू कर दी। इससे बाजार में सप्लाई बढ़ गई और ऊंची कीमतों के कारण मांग में कमी देखने को मिली। यही कारण है कि सोना और चांदी दोनों में एक ही दिन में इतनी बड़ी गिरावट दर्ज की गई।
MCX पर क्या चल रहे हैं लेटेस्ट भाव?
अगर एमसीएक्स के लाइव चार्ट पर नजर डालें, तो चांदी का फ्यूचर प्राइस करीब ₹3,31,000 के आसपास ट्रेड करता दिखाई दे रहा है। जबकि एक दिन पहले यानी 29 जनवरी को चांदी का भाव ₹4,19,000 प्रति किलो तक पहुंच गया था। इस तरह देखा जाए तो करीब ₹1 लाख तक की गिरावट बहुत कम समय में देखने को मिली है।
सोने की बात करें तो एमसीएक्स गोल्ड फ्यूचर्स में कीमत फिलहाल ₹1,58,000 प्रति 10 ग्राम के आसपास है, जबकि बीते दिन यह ₹1,80,000 के स्तर तक पहुंच गया था। यानी सोना और चांदी दोनों ने नया हाई बनाने के बाद तेज करेक्शन दिखाया है।
सराफा बाजार में भी भारी गिरावट
एमसीएक्स के साथ-साथ सराफा बाजार में भी दामों में बड़ी नरमी देखी गई। आज चांदी करीब ₹40,638 सस्ती हुई, जबकि सोने की कीमत में लगभग ₹9,500 की गिरावट आई।
इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के ताजा रेट्स के अनुसार, चांदी की कीमत अब करीब ₹3,39,000 प्रति किलो और 24 कैरेट सोने का भाव ₹1,65,000 प्रति 10 ग्राम के आसपास दर्ज किया गया है। एमसीएक्स और सराफा बाजार के दामों में फर्क इसलिए होता है क्योंकि एमसीएक्स एक ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म है, जबकि सराफा बाजार में फिजिकल सोने-चांदी की खरीद-फरोख्त होती है।
निवेशकों को कितना नुकसान हुआ?
आज की इस गिरावट के चलते कुछ ही घंटों में निवेशकों के करीब ₹33 लाख करोड़ की वैल्यू घटने की बात सामने आ रही है। ग्लोबल मार्केट में भी गोल्ड स्पॉट प्राइस ने ऑल-टाइम हाई बनाने के बाद करीब 6% तक की गिरावट दिखाई, जिसका असर भारतीय बाजार पर भी साफ नजर आया।
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क्या सोना-चांदी अब सुरक्षित निवेश नहीं रहे?
कमोडिटी एक्सपर्ट्स का मानना है कि बीते डेढ़ साल में सोना और चांदी रिकॉर्ड तेजी पर रहे हैं और निवेशकों को अच्छा रिटर्न मिला है। हालांकि, जब कोई एसेट लगातार एकतरफा तेजी दिखाता है, तो उसमें ब्रेक या करेक्शन आना स्वाभाविक होता है।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ग्लोबल स्तर पर हालात में बहुत बड़ा बदलाव नहीं हुआ है, लेकिन ऊंचे दामों पर मुनाफावसूली कभी भी देखने को मिल सकती है। यही कारण है कि मौजूदा गिरावट को एक तरह का रिट्रेसमेंट माना जा रहा है।
आगे क्या 2012 जैसा हाल दोहराया जा सकता है?
कुछ निवेशकों के मन में यह सवाल भी उठ रहा है कि कहीं 2012 जैसी स्थिति दोबारा तो नहीं बन रही, जब लंबी तेजी के बाद सोना-चांदी कई सालों तक दबाव में रहे थे। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह पूरी तरह आने वाले महीनों में वैश्विक हालात पर निर्भर करेगा।
शॉर्ट टर्म में अनुमान लगाया जा रहा था कि अगर मौजूदा रफ्तार बनी रहती तो फरवरी 2026 तक सोना ₹2 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर को छू सकता था। वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजार में 2030 तक गोल्ड के और ऊंचे स्तरों की चर्चाएं भी हैं, लेकिन यह लंबी अवधि की बातें हैं।
निवेशकों के लिए सही रणनीति क्या हो?
मार्केट जानकारों की राय है कि इस समय एक साथ बड़ा निवेश करने से बचना चाहिए। बेहतर होगा कि निवेशक थोड़ा-थोड़ा करके निवेश करें, ताकि बाजार की तेजी और गिरावट दोनों का फायदा मिल सके।
अगर कोई व्यक्ति ₹2 लाख निवेश करने की सोच रहा है, तो उसे एक साथ पूरी रकम लगाने के बजाय किस्तों में निवेश करना ज्यादा सुरक्षित माना जा रहा है। गोल्ड या सिल्वर ETF के जरिए मंथली या वीकली निवेश शुरू करना एक संतुलित तरीका हो सकता है।
निष्कर्ष
सोना और चांदी लंबी अवधि में अब भी मजबूत माने जाते हैं, लेकिन शॉर्ट टर्म में इनमें उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। ऐसे में जल्दबाजी में बड़ा फैसला लेने के बजाय संतुलित और चरणबद्ध निवेश रणनीति अपनाना ही समझदारी भरा कदम माना जा रहा है।
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