21 वर्ष के विवेक यादव ने किया कुछ ऐसा कांड जिससे पूरा प्रदेश हुआ हैरान बात जानकर आप भी हो जाएंगे हैरान

राजधानी भोपाल के करौंद इलाके में हाल ही में एक ऐसा खुलासा हुआ जिसने पुलिस से लेकर आम लोगों तक सभी को हैरान कर दिया। कोरल फेज़-2 में बने मकान नंबर 12 में रहने वाला 21 वर्षीय विवेक यादव पिछले करीब डेढ़ साल से ₹500 के नकली नोट छापने का काम कर रहा था। उसकी दिनचर्या और शांत स्वभाव देखकर किसी को अंदाज़ा भी नहीं था कि घर के अंदर वह इतनी बड़ी गैरकानूनी गतिविधि चला रहा है।


कैसे सामने आया पूरा मामला?

दो दिन पहले पुलिस को सूचना मिली थी कि इलाके में एक युवक संदिग्ध गतिविधियों में शामिल है। सूचना के आधार पर एक टीम उसके घर पहुंची। पूछताछ और तलाशी के दौरान पुलिस को 23 नकली नोट, प्रिंटिंग में इस्तेमाल होने वाला प्रिंटर, डाई, और विशेष पेपर मिले।

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जैसे ही पुलिस ने नोटों को देखा, वे भी दंग रह गए—
असली और नकली नोट में फर्क करना बेहद मुश्किल था।


विवेक की दिनचर्या: शांत, अकेला और संदिग्ध

पड़ोसियों की मानें तो विवेक:

  • दिन भर घर से बाहर रहता था
  • रात में चुपके से लौटता था
  • किसी से मिलना-जुलना लगभग नहीं था
  • कभी किसी कॉलोनी मीटिंग या कार्यक्रम में सक्रिय नहीं दिखा

लगभग 6–8 महीने पहले उसके पिता एक बार दिखे थे, उसके बाद किसी परिजन को पड़ोसियों ने नहीं देखा।

पड़ोसियों का कहना है कि उन्हें हमेशा लगता था कि विवेक नौकरी करने जाता है, क्योंकि वह सुबह निकलता और देर रात घर पहुँचता था।


कैसे करता था नकली नोटों की छपाई?

पूछताछ में विवेक ने कबूला कि:

  • वह पिछले 6–7 साल से प्रिंटिंग से जुड़ा काम कर रहा है।
  • मेहनत करके पैसा कमाना उसे मुश्किल लगता था।
  • इसी कारण उसने नकली नोट छापने का रास्ता चुना
  • वह आधे घंटे में 5 हज़ार तक के नकली नोट छाप लेता था
  • इस काम के लिए उसने विदेशों से किताबें मंगाकर नोटों की डिज़ाइन और खामियों का अध्ययन किया था।
  • विशेष रूप से वह केवल ₹500 के नोट छापता था ताकि पकड़े जाने की संभावना कम हो।

उसने यह भी बताया कि असली नोट में कितनी बार अंक लिखे रहते हैं, कौन सा पैटर्न रहता है—इन सबका उसने महीनों अध्ययन किया।


बाजार में कैसे चलाए गए इतने नकली नोट?

विवेक ने सिर्फ एक साल में:

  • ₹4–6 लाख तक के नकली नोट बाजार में चला दिए,
  • जबकि ₹2.25 लाख के नकली नोट पुलिस ने मौके से बरामद भी किए हैं।

इसकी गुणवत्ता इतनी अच्छी थी कि पुलिस भी एक नज़र में असली-नकली नहीं पहचान पाई।


भोपाल आने का कारण क्या था?

विवेक उत्तर प्रदेश का रहने वाला है।
करीब डेढ़ साल पहले वह भोपाल आया और करौंद इलाके में यह डुप्लेक्स मकान किराए पर ले लिया।

अब पुलिस यह पता लगा रही है:

  • क्या विवेक अकेले काम कर रहा था या उसके साथ कोई और भी शामिल था?
  • क्या नकली नोट सिर्फ भोपाल में चलाए गए या दूसरी जगहों पर भी?
  • उसने यह घर क्यों चुना—क्या इलाके की शांत माहौल ने उसे मौका दिया?

पड़ोसियों की प्रतिक्रिया

घटना सामने आने पर पूरी कॉलोनी में सनसनी फैल गई।
एक पड़ोसी के अनुसार:

  • “वह एकदम शांत स्वभाव का था, किसी से बोलता तक नहीं था।”
  • “जब पुलिस आई तो हमें भी समझ नहीं आया कि मामला क्या है।”

कॉलोनी की मीटिंग में भी वह कभी-कभार आता था लेकिन वहाँ भी उसने कभी अपने बारे में ज्यादा बात नहीं की।


पुलिस की आगे की कार्रवाई

फिलहाल पुलिस:

  • विवेक से लगातार पूछताछ कर रही है,
  • नकली नोटों के नेटवर्क की जांच कर रही है,
  • उसके मोबाइल, लैपटॉप और ट्रांजैक्शन की भी जांच की जा रही है।

पुलिस यह सुनिश्चित करना चाहती है कि कहीं यह मामला किसी बड़े गिरोह से तो जुड़ा नहीं है।


निष्कर्ष

एक शांत और साधारण दिखने वाले युवक द्वारा इतने बड़े फर्जीवाड़े को अंजाम दिया जाना चौंकाने वाला है। यह मामला बताता है कि तकनीक का गलत इस्तेमाल अपराधियों के लिए कितना आसान हो गया है। लेकिन पुलिस की सतर्कता और समय रहते कार्रवाई ने एक बड़े आर्थिक नुकसान को रोक दिया।

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