कुछ साल पहले जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 100 मिलियन फॉलोअर्स पूरे हुए थे, तब देशभर में इसे एक बड़ी उपलब्धि की तरह दिखाया गया। टीवी चैनल हों या सोशल मीडिया, हर जगह यही हेडलाइन थी कि “दुनिया के सबसे लोकप्रिय नेता के फॉलोअर्स 100 मिलियन पार कर गए।” मीडिया ने इसे ऐसे पेश किया जैसे यह सोशल मीडिया की दुनिया का अनोखा रिकॉर्ड हो। कई न्यूज़ चैनलों ने इस पर खास कार्यक्रम और रील्स तक बना दीं।
लेकिन वक्त के साथ तस्वीर बदलने लगी।
एक्स (Twitter) का नया अपडेट और असली–नकली अकाउंट की पहचान
कुछ दिन पहले एक्स (जिसे पहले ट्विटर कहा जाता था) ने एक महत्वपूर्ण अपडेट जारी किया। इस अपडेट के तहत हर प्रोफाइल के बारे में यह दिखना शुरू हुआ कि वह अकाउंट किस देश से बनाया गया है। इससे यह सामने आने लगा कि कई अकाउंट भारतीय नाम से तो चल रहे थे, लेकिन बने किसी और देश से थे।
इसके बाद एक्स ने तेज़ी से बॉट और फेक प्रोफाइल पहचानना शुरू किया। जैसे ही यह प्रक्रिया आगे बढ़ी, लाखों फर्जी, खरीदे हुए या ऑटो-जनरेटेड अकाउंट प्लेटफॉर्म से हटाए जाने लगे।
असर PM मोदी की प्रोफाइल पर भी दिखा
जो मीडिया पहले 100 मिलियन फॉलोअर्स का जश्न मना रहा था, वही अब इस घटती संख्या पर चुप है। एक्स पर मौजूद कई यूज़र्स के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फॉलोअर्स की संख्या:
- पहले: 109 मिलियन
- अब: लगभग 105 मिलियन
यानि करीब 40 लाख फॉलोअर्स कम हो चुके हैं।
एक्सपर्ट प्रोफाइल्स जैसे “Raga for India” ने दावा किया कि बॉट अकाउंट हटते ही असली संख्या सामने आने लगी है। यानी जो फॉलोअर्स कभी जश्न का कारण बने थे, उनमें से एक बड़ा हिस्सा फर्जी या ऑटो-जनरेटेड था।
‘I.N गठबंधन’ अकाउंट का तंज
एक अन्य प्रोफाइल “India गठबंधन” ने मज़ाक में कहा कि चुनाव आयोग जिस “एसआईआर” प्रक्रिया से नकली वोटर हटाता है, वैसा ही असर शायद एक्स पर दिख रहा है। उनका कहना था कि “SIR गलत जगह शुरू हो गया”—और इससे प्रधानमंत्री के लाखों फॉलोअर्स गायब हो गए।
क्या अभी और फॉलोअर्स घटेंगे?
यह बेहद महत्वपूर्ण सवाल है।
क्योंकि:
- एक्स लगातार बॉट्स और फर्जी प्रोफाइल हटाने में लगा है
- कई देशों से जनरेटेड भारतीय नाम वाले अकाउंट अब एक्स की नज़रों में हैं
- नए फीचर्स से असली–नकली अकाउंट की पहचान और आसान हो जाएगी
ऐसे में यह सिलसिला अभी आगे भी चल सकता है।
सोशल मीडिया और राजनीति: 2014 से अब तक का बड़ा बदलाव
2014 के बाद से सोशल मीडिया ने भारतीय राजनीति को जिस तरह प्रभावित किया है, वह किसी से छिपा नहीं है। बीजेपी और प्रधानमंत्री की डिजिटल मौजूदगी ने चुनावी रणनीतियों से लेकर जनता तक पहुंच बनाने में अहम भूमिका निभाई है।
इसलिए मोदी के फॉलोअर्स में आई यह गिरावट सिर्फ एक संख्या नहीं है, बल्कि यह सवाल भी उठाती है कि कितने फॉलोअर्स असली थे और कितने बनाए गए थे?
निष्कर्ष
एक्स के नए अपडेट ने सोशल मीडिया की दुनिया में पारदर्शिता बढ़ाने का काम किया है। फर्जी फॉलोअर्स हटने के बाद अब असली संख्या सामने आ रही है। प्रधानमंत्री मोदी के घटते फॉलोअर्स इस पूरी प्रक्रिया का हिस्सा हैं और आने वाले समय में यह ट्रेंड आगे बढ़ सकता है।
फिलहाल, इतना साफ है कि सोशल मीडिया की चमकती हुई दुनिया में सच्चे और नकली के बीच की रेखा अब पहले से कहीं ज्यादा साफ होती जा रही है।