आजकल मोबाइल, लैपटॉप और टीवी के ज़्यादा इस्तेमाल से आंखों पर असर जल्दी पड़ने लगा है। ऐसे में यह समझना बहुत ज़रूरी है कि हमारी आंखें ठीक तरह से काम कर रही हैं या नहीं। अच्छी बात यह है कि कुछ बेसिक आई-टेस्ट आप घर पर ही कर सकते हैं।
इन टेस्ट से आप यह समझ सकते हैं कि आपकी आंखों में कोई कमी या शुरुआती समस्या तो नहीं है। आइए, एक-एक करके इन सभी टेस्ट को सरल भाषा में समझते हैं।
1. स्नेलेंस विजुअल एक्यूटी टेस्ट
यह वही टेस्ट है जिससे हम अपनी दूर की नजर चेक करते हैं। इसका चार्ट ऑनलाइन आसानी से मिल जाता है।
कैसे करें:
- चार्ट को घर की किसी दीवार पर लगा दें।
- उससे 6 मीटर दूरी पर खड़े हों।
- पहले दाईं आंख से पढ़ें, फिर बाईं आंख से।
यदि अक्षर साफ दिखते हैं, तो आपकी दूर की नजर सामान्य है।
अगर धुंधला दिखे, तो संभव है कि आपको चश्मे की जरूरत हो।
2. एस्टिगमैटिक डायल टेस्ट
यह टेस्ट बताता है कि आपकी आंखों में एस्टिगमैटिज़्म है या नहीं।
एस्टिगमैटिज़्म क्या होता है?
आपका कॉर्निया पूरी तरह गोल (बॉल जैसा) नहीं बल्कि थोड़ा अंडाकार (एग जैसा) हो जाता है। ऐसे में कुछ लाइनें साफ और कुछ धुंधली दिखती हैं। इसे ठीक करने के लिए सिलेंड्रिकल नंबर वाला चश्मा दिया जाता है।
कैसे करें:
- चश्मा पहनते हैं तो थोड़ी देर के लिए उतार दें।
- चार्ट में एक सर्कल होगा जिससे कई लाइनें बाहर की ओर जा रही होंगी।
- एक समय में एक ही आंख से देखें।
अगर सभी लाइनें एक जैसी दिखें = कोई समस्या नहीं।
कुछ लाइनें क्लियर और कुछ ब्लर = एस्टिगमैटिज़्म मौजूद है।
3. इशिहारा कलर विज़न टेस्ट
यह टेस्ट हमारी रंग पहचानने की क्षमता चेक करता है।
कैसे करें:
- एक-एक कर दोनों आंखों से अलग-अलग तस्वीरें देखें।
- हर तस्वीर में छिपा हुआ नंबर पहचानें।
रिजल्ट:
- 12 साफ दिखना चाहिए।
- 73 साफ दिखना चाहिए।
- तीसरी तस्वीर में
- सामान्य नजर → 8
- रेड-ग्रीन डेफिशिएंसी → 3
- पूरी कलर डेफिशिएंसी → कुछ भी नंबर नहीं दिखेगा।
यदि रंग पहचानने में दिक्कत हो, तो तुरंत आई डॉक्टर से दिखाना चाहिए।
4. कलर सेंसिटिविटी टेस्ट
इससे पता चलता है कि कहीं आपकी ऑप्टिक नर्व में कोई समस्या तो नहीं।
कैसे करें:
- नीचे दिए गए कलर-शेड्स में देखें कौन सा शेड दूसरों से अलग है।
- घर पर चेक करने के लिए एक लाल पेन का कैप या लाल आई ड्रॉप का ढक्कन देखें।
अगर लाल रंग हल्का, फीका या गुलाबी लगे तो ऑप्टिक नर्व में समस्या का संकेत हो सकता है।
5. विजुअल फील्ड टेस्ट
यह टेस्ट ग्लूकोमा जैसे रोगों में बेहद महत्वपूर्ण होता है।
कैसे करें:
- एक आंख बंद करें।
- स्क्रीन के बीच में बने डॉट पर नजर टिकाएं।
- किनारे-किनारे जो छोटी-छोटी लाइट्स चमकती हैं, उन्हें गिनें।
- यह प्रक्रिया दूसरी आंख से भी दोहराएं।
अगर लगभग 10 लाइट्स दिखें, तो आपकी विजुअल फील्ड सामान्य मानी जाती है।
6. एम्सलर ग्रिड टेस्ट
यह रेटिना, खासकर मैकुला के स्वास्थ्य की जांच करता है।
कैसे करें:
- एक आंख बंद करें।
- दूसरी आंख से ग्रिड के सेंटर वाले डॉट को देखें।
- देखें कि सभी लाइनें सीधी हैं या नहीं।
रिजल्ट:
- सारी लाइनें सीधी और समान → रेटिना स्वस्थ।
- बीच में काला, धुंधला हिस्सा → स्कोटोमा।
- लाइनें टेढ़ी-मेढ़ी दिखें → मेटामॉर्फोप्सिया।
ये संकेत रेटिना की बीमारी की ओर इशारा करते हैं, ऐसे में तुरंत रेटिना स्पेशलिस्ट को दिखाना चाहिए।
क्या ये टेस्ट डॉक्टर को दिखाने की जगह ले सकते हैं?
नहीं।
ये सिर्फ स्क्रीनिंग टेस्ट हैं—यानि शुरुआती संकेत दे सकते हैं कि आंखों में समस्या है या नहीं।
ओपीडी में किए जाने वाले टेस्ट ज़्यादा सटीक, वैज्ञानिक और डायग्नोस्टिक होते हैं। इसलिए अगर किसी भी टेस्ट में असामान्य परिणाम आए, तो तुरंत डॉक्टर से मिलना जरूरी है।
आखिरी बात
आंखें बेहद संवेदनशील होती हैं और उनकी नियमित जांच बहुत जरूरी है। ये घर पर किए जाने वाले टेस्ट आपको अपनी आंखों की स्थिति समझने में मदद करते हैं, लेकिन इलाज या डायग्नोसिस के लिए डॉक्टर ही सबसे विश्वसनीय मार्ग होते हैं।
स्वस्थ रहें, अपनी आंखों का ध्यान रखें — क्योंकि नजर साफ हो तो दुनिया भी खूबसूरत लगती है।