सोने और चांदी की कीमतों ने इतिहास रच दिया है। आज चांदी पहली बार ₹3 लाख प्रति किलो के स्तर को पार कर गई है। हैरानी की बात यह है कि सिर्फ एक ही दिन में चांदी की कीमत में करीब ₹14,000 की उछाल देखने को मिली है।
बीते एक महीने के भीतर चांदी ₹2 लाख से सीधा ₹3 लाख तक पहुंच गई है। बाजार के जानकारों का मानना है कि साल 2026 के दौरान चांदी के भाव ₹4 लाख तक भी जा सकते हैं।
इन रिकॉर्ड तोड़ दामों के बीच निवेशकों के मन में सवाल है कि क्या आगे भी सोना-चांदी महंगे होते रहेंगे। आइए समझते हैं मौजूदा भाव, बाजार का रुझान और एक्सपर्ट्स के अनुमान।
चांदी के ताजा भाव और बाजार का हाल
एमसीएक्स (MCX) पर सिल्वर फ्यूचर्स का भाव इस समय करीब ₹3,20,000 के आसपास कारोबार करता दिख रहा है। चार घंटे के टाइम-फ्रेम वाले चार्ट में साफ नजर आता है कि बाजार में मजबूत तेजी बनी हुई है।
वीकेंड के बाद बाजार खुलते ही चांदी में बड़ा गैप-अप देखने को मिला, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में पहले से ही तेजी बनी हुई थी।
अगर ग्लोबल मार्केट की बात करें, तो चांदी करीब 93 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस के स्तर पर ट्रेड कर रही है। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर यह तेजी बनी रही, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी 100 डॉलर प्रति औंस तक भी जा सकती है। यानी मौजूदा स्तर से करीब 7–8% की और तेजी की संभावना जताई जा रही है।
सोने की कीमत भी ऑल-टाइम हाई पर
चांदी के साथ-साथ सोना भी नए रिकॉर्ड बना रहा है। एमसीएक्स पर सोने का भाव करीब ₹1,45,000 प्रति 10 ग्राम तक पहुंच चुका है। वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना लगभग 4665 डॉलर प्रति औंस के आसपास ट्रेड कर रहा है।
सोने का मार्केट स्ट्रक्चर भी फिलहाल बुलिश बना हुआ है और जानकारों के मुताबिक आने वाले समय में इसमें और तेजी देखी जा सकती है।
चांदी के दाम इतनी तेजी से क्यों बढ़े?
अगर चांदी के सफर पर नजर डालें, तो यह तेजी काफी चौंकाने वाली है।
- ₹1 लाख से ₹2 लाख तक पहुंचने में चांदी को करीब 9 महीने लगे
- लेकिन ₹2 लाख से ₹3 लाख तक पहुंचने में सिर्फ करीब 1 महीना
इसके पीछे कई बड़े कारण हैं:
औद्योगिक मांग में तेज उछाल –
चांदी का इस्तेमाल सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, 5G टेक्नोलॉजी और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स में बड़े पैमाने पर हो रहा है। ग्रीन एनर्जी पर बढ़ता वैश्विक फोकस भी इसकी मांग बढ़ा रहा है।
सप्लाई की कमी –
चांदी का उत्पादन उसकी मांग के मुकाबले तेजी से नहीं बढ़ पा रहा है। खास बात यह है कि लगभग 70% चांदी तांबा और जिंक जैसी धातुओं की माइनिंग के दौरान बाय-प्रोडक्ट के रूप में निकलती है, यानी इसकी अलग से बड़े स्तर पर खुदाई नहीं होती।
सुरक्षित निवेश की मांग –
दुनियाभर में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव और शेयर बाजारों में उतार-चढ़ाव के चलते निवेशक सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। ऐसे समय में सोना और चांदी को सेफ एसेट माना जाता है।
शेयर बाजार की गिरावट और निवेशकों का रुख
हाल के दिनों में भारतीय शेयर बाजार में लगातार गिरावट देखने को मिली है। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में कमजोरी दर्ज की गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक जनवरी के पहले 15 दिनों में ही विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से बड़ी रकम निकाली है।
ऐसे माहौल में निवेशकों का पैसा शेयर बाजार से निकलकर कमोडिटी जैसे सोना-चांदी की ओर जाना स्वाभाविक माना जा रहा है।
एक्सपर्ट्स क्या कहते हैं चांदी के भविष्य को लेकर?
कई रिसर्च फर्म और बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रीन एनर्जी और ईवी सेक्टर की बढ़ती मांग के चलते चांदी में लंबी अवधि तक तेजी बनी रह सकती है। कुछ अनुमानों के मुताबिक 2026 में चांदी ₹3.20 लाख से ₹3.94 लाख प्रति किलो तक पहुंच सकती है।
कुछ ग्लोबल एक्सपर्ट्स का यह भी मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी की कीमतें आने वाले समय में और ऊंचे स्तर देख सकती हैं, जिसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ेगा।
क्या अभी चांदी में निवेश करना सही है?
इतिहास बताता है कि जब कोई एसेट ऑल-टाइम हाई पर होता है, तो एक साथ बड़ी रकम निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है। इसलिए कई जानकारों की राय है कि निवेशकों को गिरावट के दौरान धीरे-धीरे निवेश बढ़ाना चाहिए।
निवेश के लिए लोग आमतौर पर तीन तरीकों को चुनते हैं:
- फिजिकल सिल्वर
- सिल्वर ETF या SIP
- MCX पर सिल्वर फ्यूचर्स
निष्कर्ष
चांदी का ₹3 लाख के पार पहुंचना एक ऐतिहासिक घटना है। सोना और चांदी दोनों ही इस समय मजबूत तेजी के दौर में हैं। एक तरफ सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ी है, तो दूसरी ओर औद्योगिक जरूरतें भी कीमतों को सहारा दे रही हैं।
ये थे आज के सोना-चांदी के ताजा भाव और बाजार से जुड़े अनुमान, जिनसे निवेशकों को मौजूदा हालात समझने में मदद मिलती है।