दिल्ली में 15 दिन में 800 से ज्यादा लोग लापता, आंकड़े डराने वाले सवाल खड़े करते हैं

देश की राजधानी दिल्ली, जिसे सुरक्षा और सुविधाओं का मॉडल होना चाहिए था, आज अपनी एक डरावनी तस्वीर पेश कर रही है। दिल्ली पुलिस के हालिया आंकड़ों ने सबको चौंका दिया है। साल 2026 के शुरुआती 15 दिनों में ही दिल्ली के अलग-अलग इलाकों से 800 से अधिक लोग लापता हो चुके हैं।

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जनवरी 2026: 15 दिन और 807 जिंदगियां लापता

दिल्ली पुलिस के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 1 से 15 जनवरी के बीच गुमशुदगी के कुल 807 मामले दर्ज किए गए। इनमें सबसे डराने वाली बात महिलाओं और बच्चों की संख्या को लेकर है।

  • महिलाएं और लड़कियां: कुल 509 मामले दर्ज।
  • पुरुष: 298 लोग लापता।
  • रिकवरी: पुलिस अब तक केवल 235 लोगों को ही सुरक्षित ढूंढ पाई है, जबकि 572 लोग अब भी लापता हैं।

मासूमों पर संकट: 71% बच्चे अब भी अनट्रेस

बच्चों और किशोरों से जुड़े आंकड़े प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े करते हैं।

  • रिपोर्ट के अनुसार, 169 किशोर लापता हुए, जिनमें 138 लड़कियां शामिल हैं।
  • हैरानी की बात यह है कि पुलिस इनमें से केवल 29 लड़कियों और 19 लड़कों को तलाश पाई है। यानी करीब 121 बच्चे अभी भी अपने परिवारों से दूर किसी अनजान जगह पर हैं।
  • 8 साल से कम उम्र के 9 मासूम गायब हुए, जिनमें से 6 का अब तक कोई सुराग नहीं मिला है।

बीता दशक: आंकड़ों की जुबानी दिल्ली का हाल

अगर हम पिछले 10 सालों (2016-2026) का रिकॉर्ड देखें, तो यह किसी डरावनी फिल्म जैसा लगता है:

  1. कुल लापता लोग: पिछले 10 वर्षों में दिल्ली से 2,32,737 लोग गायब हुए।
  2. लापता बच्चे: इसी अवधि में 60,694 नाबालिग लापता हुए। हालांकि पुलिस ने इनमें से 53,763 को खोज निकाला, लेकिन 6,931 बच्चों का आज तक कोई पता नहीं चला।
  3. साल 2025 का रिकॉर्ड: पिछले पूरे साल में 24,508 लोग लापता हुए थे, जिनमें 60% से ज्यादा (14,870) महिलाएं थीं।

सिर्फ संख्या नहीं, उजड़ते परिवार हैं ये

ये महज फाइलों में दर्ज कोई नंबर नहीं हैं, बल्कि वे लोग हैं जिनका अपना एक परिवार है, एक पहचान है। सवाल यह उठता है कि दिल्ली जैसी जगह पर, जहाँ प्रशासन और तकनीक का बोलबाला है, वहाँ लोग अचानक कहाँ ओझल हो जाते हैं? प्रदूषण और बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझती दिल्ली के निवासियों के लिए अब ‘सुरक्षा’ सबसे बड़ी चिंता बन गई है। बाहर कदम रखते ही गायब हो जाने का डर अब राजधानी की गलियों में घर करने लगा है।

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निष्कर्ष

प्रशासन अपनी कार्रवाई का दावा तो करता है, लेकिन 11% बच्चों का कभी न मिलना और हजारों महिलाओं का अनट्रेस रह जाना एक बड़ी विफलता की ओर इशारा करता है। आखिर इन गुमशुदा जिंदगियों की जिम्मेदारी किसकी है?

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