SBI ग्राहकों के लिए दो बड़ी खबरें: महंगा हुआ पैसा ट्रांसफर, एक KYC से होंगे सारे काम

अगर आपका खाता स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) में है, तो यह अपडेट आपके लिए जानना जरूरी है। देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक ने ऑनलाइन पैसे भेजने से जुड़े नियमों में बदलाव किया है, जिससे अब कुछ ट्रांजैक्शन पर ज्यादा शुल्क देना पड़ सकता है।

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हालांकि, इसी बीच सरकार की ओर से एक राहत भरी खबर भी सामने आई है, जिससे केवाईसी की झंझट काफी हद तक खत्म होने वाली है। अब बैंक, बीमा और शेयर बाजार से जुड़े कामों के लिए अलग-अलग केवाईसी कराने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

आइए, इन दोनों अहम बदलावों को विस्तार से समझते हैं।

सरकार की नई पहल: अब एक KYC से सब कुछ आसान

डिजिटल दौर में केवाईसी यानी नो योर कस्टमर प्रक्रिया आज भी लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। नया बैंक खाता खोलना हो, म्यूचुअल फंड में निवेश करना हो या बीमा पॉलिसी लेनी हो—हर जगह वही दस्तावेज दोबारा जमा करने पड़ते हैं। इससे समय भी जाता है और कागजी खर्च भी बढ़ता है।

अब इस समस्या को खत्म करने के लिए सरकार सेंट्रल केवाईसी रिकॉर्ड्स रजिस्ट्री (CKYCR) को पूरी तरह लागू करने की तैयारी में है। आसान शब्दों में कहें तो यह वन नेशन, वन केवाईसी जैसा सिस्टम होगा।

इस व्यवस्था के तहत हर व्यक्ति को एक 14 अंकों का CKYC नंबर मिलेगा, जो आधार और पैन कार्ड से जुड़ा होगा। किसी भी बैंक या वित्तीय संस्थान में काम करवाते समय आपको बार-बार दस्तावेज देने की जरूरत नहीं पड़ेगी, सिर्फ यह नंबर बताना होगा और आपकी सारी जानकारी सिस्टम से मिल जाएगी।

इसका सबसे बड़ा फायदा तब मिलेगा जब आप अपना शहर या पता बदलेंगे। पहले अलग-अलग बैंक, बीमा और डीमैट अकाउंट में पता अपडेट कराना पड़ता था, लेकिन अब एक जगह जानकारी बदलते ही सभी लिंक खातों में नया पता अपने आप अपडेट हो जाएगा। इससे समय और पैसे—दोनों की बचत होगी।

SBI का फैसला: IMPS से पैसे भेजना हुआ महंगा

अब बात करते हैं उस खबर की जो SBI के करोड़ों ग्राहकों की जेब पर असर डाल सकती है। अगर आप SBI के जरिए IMPS (Immediate Payment Service) का इस्तेमाल करते हैं, तो अब इस पर सर्विस चार्ज देना पड़ सकता है।

IMPS एक ऐसी सुविधा है, जिससे किसी भी समय—even छुट्टी के दिन भी—तुरंत पैसा ट्रांसफर किया जा सकता है। यही वजह है कि लोग इसका ज्यादा इस्तेमाल करते हैं।

नए नियमों के अनुसार, SBI ने ट्रांजैक्शन अमाउंट के हिसाब से चार्ज तय किया है।
संभावना है कि ₹1000 तक के ट्रांसफर पर कोई शुल्क न लगे, लेकिन इससे ज्यादा रकम भेजने पर चार्ज लागू होगा। जैसे-जैसे भेजी गई राशि बढ़ेगी, शुल्क भी उसी अनुसार बढ़ेगा। इसके अलावा, बैंक द्वारा लिए गए चार्ज पर GST अलग से देना होगा।

यह बदलाव खास तौर पर उन लोगों को प्रभावित करेगा, जो छोटे-मोटे लेनदेन या परिवार को नियमित रूप से पैसे भेजने के लिए IMPS का इस्तेमाल करते हैं। बैंक का कहना है कि यह शुल्क डिजिटल सिस्टम को सुरक्षित और बेहतर बनाए रखने के लिए जरूरी है, जबकि ग्राहकों का मानना है कि डिजिटल लेनदेन मुफ्त होने चाहिए।

क्या करें ग्राहक?

पैसे भेजने से पहले SBI की वेबसाइट या मोबाइल ऐप पर चार्ज से जुड़ी जानकारी जरूर देख लें। अगर संभव हो, तो UPI का इस्तेमाल करें, क्योंकि फिलहाल आम यूज़र्स के लिए UPI पर कोई शुल्क नहीं लिया जा रहा है।


इस तरह, एक तरफ सरकार केवाईसी प्रक्रिया को आसान बनाकर ग्राहकों को राहत दे रही है, वहीं दूसरी ओर SBI ने डिजिटल ट्रांजैक्शन पर चार्ज लगाकर बोझ बढ़ा दिया है।

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